हम सभी नाटक करते हैं जो रोज़ जीवन में घटित होता है उसको जमा करके मंच पर दिखा देना एक बात है जो हम में से कुछ आगे आकर कर पाते हैं।कुछ नहीं।
मैंने कभी किसी नाटक सँस््थान से कोई प््रशिक्षण नहीं लिया। बस अचानक पता नहीं मन हुआ कि मंच पर जाकर जीवन जिया जाए। कुछ सच कुछ मन घड़ंत। और एक दिन लगा कि जो कुछ-२ हो रहा है इसको एक जगह जमा कर दिया जाय शायद कुछ लोगों को इसमें कुछ मिल जाए
सबसे पहला नाटक
अमेरिका के अटलांटा शहर में चलने वाले हिन््दी विद््यालय के वर््ष १९९८ के वार््षिक समारोह से पहले नाटक की शुरुआत हुई जो बच््चों कि लिये था। नाटक का नाम था 'बीरबल की चतुराई' जो बीरबल के मशहूर किस््सों में से लिया था।
बचपन में पढ़े किस््से को scipt की शक््ल दी मैंने। इसकी वीडिओ आप नीचे लिखे लिंक पर click करने पर देख सकते हैं। उद््देश््य था मनोरंजन व बच््चों को, हाँ और हिन््दी सिखाने में मददगार तो था ही।
दूसरा मौका दिया
'धूप छाँव' एक छोटा सा संगठन वर्तमान एटलांटावासी पर मूलत: भारतवासी सन्ध्या भगत का एक प्रयास एक सपना,जो कहतीं हैं। इस विदेश में 'पर सच है कि अब ये पूर्णत: विदेश नहीं है मेरे लिये, क्योंकि आज ये मेरा घर है मैंने यहाँ आकर बहुत कुछ सीखा है पाया है। ये मेरे लिये उस तरह से है जैसे कि श्रीकृष्ण के लिये यशोदा मां थीं।
इस विदेश में रहकर तो स्वदेश की कीमत और बढ़ जाती है। मेरा मानना है हर हर उस चीज़ की कीमत तब पहचानते हैं जब हम उससे दूर चले आते हैं।
live shows करना मेरा पहला शौक है मुझे स्वंय शुरु से श्रवण की तुलना में दृश्य माध्यम में ज्यादा मज़ा आता था तो (बचपन में किताबों से तो दूर भागती थी पर टेलिविज़न पर कुछ भी देखना अच्छा लगता था) सो आदतानुसार अपने साथ सबको भी शामिल कर लिया है।
दस साल पहले जब एटलांटा शहर आयी तो मन में सपना था एटलांटा में रहने वाले बच्चों या बड़ों को हिन्दी सिखा सकूँ। शुरू शुरू में 'बाल विहार' में बच्चों के साथ नाटक किये। जब साथ रहने वाले कुछ दोस्तों को लगा कि नाटक करवा सकती हूँ और उनके उकसाने पर अन्तत: एक नाट्य मंच बनाने का निश्चह किया।
'धूप छाँव' का कोई निश्चित उद्देश्य नहीं है ये सबके लिये खुला है। पर एक बात जरूर है ये एक हिन्दी नाट्य संगठन है इसलिये यहाँ सारा कार्यक्रम हिन्दी में होता है। पर ऐसा कतई नहीं है इससे अभिप्राय ये है कि कहीं भी रहने वाले अन्य भाषाओ,संस्कृतियों,धर्मों के लोगों का इसमें स्वागत है शामिल होंगी ही नहीं मूलत: मनोरंजन की भाषा हिन्दी होगी हिन्दी के साथ उर्दू तो मिली है ही और अंग्रेजी भी साथ चलती है साथ ही भारत की सभी प्रान्तीय भाषाऐं।
ये एक ऐसी वेबसाइट है जहाँ से आप धूप-छाँव के बारे में भरपूर जानकारी ले सकते हैं।
मैं जानती हूँ हमारे कुछ भारतीय मित्र ऐसे हैं जो इसका मज़ा लेना चाहते हैं पर वे हिन्दी पढ़ने में असमर्थ हैं या फिर कुछ विदेशी मित्र हैं जो हिन्दी नहीं जानते पर फिर भी इस संगठन के बारे में जाना चाहेंगे उनके लिये इस परिचय को अंग्रेज़ी में भी अनुवादित कर रहे हैं।
स्कूल-कॉलेज के ज़माने में रंग मंच से जो नाता टूटा तो वो जुड़ा आकर १९९७ में एटलांटा शहर के बाल-विहार विद्यालय के वार्षिक कार्यक्रम में अपने पहले नाटक दर्ज़ी की चतुराईसे और नौटंकी की शुरुआत हुई iaca के १५ अगस्त पर होने वाले कार्यक्रम festival of India में होने वाले वार्षिक कार्यक्रम में नाटक 'आतिथ्य की मर्यादा में ब्राह्मणी का चरित्र के साथ।
किसी कारणवश इस कार्यक्रम की मंच के वीडिओ उपलब्ध नहीं हैं पर कुछ धुंधले चित्र जऱूर उपलब्ध हैं और कुछ चित्र तैयार होने के समय के ज़रूर हैं जो यहाँ सलंघ्न हैं।
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